Save Aravali Hills: प्रकृति, पर्यावरण और हमारा भविष्य
अरावली पर्वत श्रृंखला (Aravali Hills) भारत की सबसे प्राचीन और विश्व की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखलाओं में से एक मानी जाती है। वैज्ञानिकों और भू-वैज्ञानिकों के अनुसार अरावली पहाड़ियाँ लगभग 150 करोड़ से 250 करोड़ वर्ष पहले प्रीकैम्ब्रियन काल में बनी थीं। यह पर्वत श्रृंखला गुजरात के पालनपुर से लेकर दिल्ली तक लगभग 800 किलोमीटर की लंबाई में फैली हुई है और राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली व गुजरात जैसे राज्यों को कवर करती है।
अरावली पहाड़ियाँ कभी ऊँचे और मजबूत पर्वत थे, लेकिन करोड़ों वर्षों के कटाव (erosion) के कारण आज ये अपेक्षाकृत कम ऊँचाई के पहाड़ बन चुके हैं। यह क्षेत्र प्राचीन सभ्यताओं के विकास का साक्षी रहा है और यहाँ से कई ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक प्रमाण मिले हैं।
अरावली पहाड़ियाँ उत्तर भारत के पर्यावरण के लिए एक प्राकृतिक सुरक्षा कवच की तरह कार्य करती हैं। इनके प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं:
मरुस्थल रोकने में सहायक: अरावली पहाड़ियाँ थार रेगिस्तान को दिल्ली और गंगा के मैदानी इलाकों की ओर बढ़ने से रोकती हैं।
वायु प्रदूषण कम करना: ये पहाड़ियाँ धूल, प्रदूषण और जहरीली हवाओं को रोककर दिल्ली-NCR की हवा को संतुलित करती हैं।
जल संरक्षण: अरावली क्षेत्र भू-जल recharge का प्रमुख स्रोत है, जिससे कुएँ, तालाब और नदियाँ जीवित रहती हैं।
जैव विविधता का केंद्र: यहाँ सैकड़ों प्रजातियों के पेड़-पौधे, पक्षी, जानवर और औषधीय वनस्पतियाँ पाई जाती हैं।
जलवायु संतुलन: अरावली तापमान को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
वर्तमान समय में अरावली पहाड़ियाँ गंभीर संकट का सामना कर रही हैं:
अवैध खनन (Illegal Mining)
वनों की अंधाधुंध कटाई
शहरीकरण और रियल एस्टेट परियोजनाएँ
औद्योगिक प्रदूषण
सरकारी नियमों का उल्लंघन
इन कारणों से अरावली का प्राकृतिक संतुलन तेजी से नष्ट हो रहा है।
यदि अरावली पहाड़ियाँ पूरी तरह नष्ट हो गईं, तो इसके परिणाम भयावह होंगे:
थार रेगिस्तान दिल्ली और हरियाणा तक फैल सकता है
दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण कई गुना बढ़ जाएगा
भू-जल स्तर तेजी से गिर जाएगा
गर्मी की तीव्रता बढ़ेगी और वर्षा अनियमित हो जाएगी
जैव विविधता पूरी तरह नष्ट हो जाएगी
मानव जीवन और स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा
यह केवल पर्यावरणीय नहीं बल्कि मानव अस्तित्व का संकट बन सकता है।
अरावली पहाड़ियों को बचाना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण, अवैध खनन के खिलाफ आवाज़ उठाना और जागरूकता फैलाना ही अरावली को बचाने का एकमात्र रास्ता है।
Save Aravali Hills का मतलब है –
? प्रकृति को बचाना
? पर्यावरण को सुरक्षित रखना
? आने वाली पीढ़ियों का भविष्य बचाना